Posts

Showing posts from June, 2022

किसी को आदत बनाना गलत हैं या नहीं ?

 हम सभी की  ज़िंदगी में कई ऐसे लोग होते है ,जिनके साथ समय बिताना हमें बहुत अच्छा लगता हैं .और ऐसे लोग हमारी ज़िंदगी में कुछ ही लोग होते हैं.उदाहरण के तौर पर चाहे शॉपिंग पर जाना हो या किसी रेस्टोरेंट में खान हम हर किसी के भी साथ नहीं जाते.वो कुछ लोग ही होते हैं.और वो कुछ लोग कोई भी हो सकता हैं.हो सकता हैं कि वो आपका सबसे अच्छा दोस्त हो.आपका कोई कज़न हो, या आपके माता पिता . रोज़ की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में  सुकून के पल हम ऐसे ही किसी के साथ बिताते हैं.जो हफ्ते भर की चिंता में हमें सुकून पहुंचा सकें.देखा जाएं तो पूरे हफ्ते भर की टेंशन और भागदौड़ में हम ऐसे इंसान को चुनते हैं जो हमारे टेंशन को कम कर सके.  .और जब ये सिलसला चलता ही रहता हैं तो ये हमारी आदत बन जाता हैं.पर सवाल ये हैं कि जब वही इंसान जिसे हम अपना स्ट्रैस बस्टर (stress buster) समझते हैं यानी हमारी चिंता हरने वाला ,वही अगर हमसे पीछा छुड़ाने वाला बन जाएं तो,और देखा जाएं तो ऐसा दौर लगभग सबके जीवन में आता हैं.  और यहीं से हमारे दिमाग का कीमा बनता हैं. मतलब ये कि ,हम तो उसे अपनी आदत बना लेते हैं. पर वो आदत हमस...

देश की सेवा करने वालों को मिला 4 साल के लिए लॉलीपॉप

कहते हैं कि काम छोटा या बड़ा नहीं  होता हैं, हर काम की अहमियत होती हैं. टीचर, डॉक्टर ,मैकेनिक ,दर्जी, आया, आदि.जो भी व्यक्ति काम करता हैं उसकी अहमियत होती हैं. लेकिन शायद किसी पेश में मरना नहीं लिखा होता हैं. पर एक सिपाही ,एक आर्मी ऐसा पेशा है कि उसमें आपको अपनी जान भी समर्पित करनी होती हैं..... इसलिए इसमें हर कोई नहीं जाना चाहता ,और जो भी ये पेशा चुनता हैं तो समझ जाइएं कि उसका  जिगरा आपसे बड़ा हैं  जनाब. इसलिए जब कोई आर्मी में जाने का फैसला करता हैं तो वो अपना दिल,दिमाग और अपना शरीर पूरी तरह से समर्पित करता हैं.देखा जाएं तो ये सेना में जाने से पहले ही वीर हो जाते हैं, क्योंकि इन्होंने पहले से ही कुर्बान होने का निर्णय ले लिया है.  और यही कारण हैं कि उनके गुस्से से आज पूरा देश धदक रहा हैं. सरकार ने इन वीर जवानों को चार साल का लॉलीपॉप दिया हैं . चार साल के लिए ये अपना तन मन कुर्बान करें और फिर उसके बाद टाटा बाए-बाए. सरकार ने भी महंगा गिफ्ट दिया , एक तो कई साल से भर्तियां नहीं निकल रही थी. और अब निकली भी तो मात्र चार साल के लिए .वाह ! एक बार आप खुद सोचिए कि क्या सेना क...