देश की सेवा करने वालों को मिला 4 साल के लिए लॉलीपॉप
कहते हैं कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता हैं, हर काम की अहमियत होती हैं. टीचर, डॉक्टर ,मैकेनिक ,दर्जी, आया, आदि.जो भी व्यक्ति काम करता हैं उसकी अहमियत होती हैं. लेकिन शायद किसी पेश में मरना नहीं लिखा होता हैं. पर एक सिपाही ,एक आर्मी ऐसा पेशा है कि उसमें आपको अपनी जान भी समर्पित करनी होती हैं.....
इसलिए इसमें हर कोई नहीं जाना चाहता ,और जो भी ये पेशा चुनता हैं तो समझ जाइएं कि उसका जिगरा आपसे बड़ा हैं जनाब. इसलिए जब कोई आर्मी में जाने का फैसला करता हैं तो वो अपना दिल,दिमाग और अपना शरीर पूरी तरह से समर्पित करता हैं.देखा जाएं तो ये सेना में जाने से पहले ही वीर हो जाते हैं, क्योंकि इन्होंने पहले से ही कुर्बान होने का निर्णय ले लिया है.
और यही कारण हैं कि उनके गुस्से से आज पूरा देश धदक रहा हैं. सरकार ने इन वीर जवानों को चार साल का लॉलीपॉप दिया हैं . चार साल के लिए ये अपना तन मन कुर्बान करें और फिर उसके बाद टाटा बाए-बाए. सरकार ने भी महंगा गिफ्ट दिया , एक तो कई साल से भर्तियां नहीं निकल रही थी. और अब निकली भी तो मात्र चार साल के लिए .वाह !
एक बार आप खुद सोचिए कि क्या सेना के जवानों के साथ ये सही हैं.और जिन्हें भी सरकार का ये फैसला सही लग रहा हैं,वो एक बार अपने बच्चे या कि किसी भी अपने को चार साल के लिए भेजेगा.और वहां तो ये भी भरोसा नहीं कि वो चार साल बाद लौट के आएगे भी या नहीं क्योंकि आर्मी में तो वैसे भी किसी की ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं होता .
हद हैं, इसी को कहते है अंधेर नगरी में चौपट राजा.खास बात तो ये है कि इस वक्त भक्तों की भक्ति भी देखी जा सकती हैं.जो भी इस भगवा सरकार का पक्ष ले रहे हैं.एक बार ये तो सोचिएं कि क्या ये नौजवानों के साथ अन्नाय नहीं हैं. इतना ही नहीं कुछ लोग तो ये कर रहे हैं कि "देश की सेवा करने के लिए चार साल का मैका मिल रहा हैं .और उसपर ये अग्निवीरअपना फायदा देख रहे हैं ".सच में इसलिए कहते हैं कि कभी किसी राजनीति से जुड़े व्यक्ति का मुरीद नहीं होना चाहिएं. आप सरकार और उसकी विचारधार को ज़रूर सपोर्ट करिएं , लेकिन ये भी देखिए कि उनके द्वारा लिए गए फैसले क्या सच में सही हैं.....
ये कहना गलत नहीं होगा कि अगर ऐसे ही लोगों का मौजूदा सरकार के प्रति अंधा पन ,अंध भक्ति बरकरार रहेगी ,तो कही इस देश को डूबा न दें....
इसके साथ ही ये सोचिएगा ज़रूर कि क्या सच में ये अग्निपथ योजना सही हैं ?
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