किसी को आदत बनाना गलत हैं या नहीं ?

 हम सभी की  ज़िंदगी में कई ऐसे लोग होते है ,जिनके साथ समय बिताना हमें बहुत अच्छा लगता हैं .और ऐसे लोग हमारी ज़िंदगी में कुछ ही लोग होते हैं.उदाहरण के तौर पर चाहे शॉपिंग पर जाना हो या किसी रेस्टोरेंट में खान हम हर किसी के भी साथ नहीं जाते.वो कुछ लोग ही होते हैं.और वो कुछ लोग कोई भी हो सकता हैं.हो सकता हैं कि वो आपका सबसे अच्छा दोस्त हो.आपका कोई कज़न हो, या आपके माता पिता .

रोज़ की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में  सुकून के पल हम ऐसे ही किसी के साथ बिताते हैं.जो हफ्ते भर की चिंता में हमें सुकून पहुंचा सकें.देखा जाएं तो पूरे हफ्ते भर की टेंशन और भागदौड़ में हम ऐसे इंसान को चुनते हैं जो हमारे टेंशन को कम कर सके. 

.और जब ये सिलसला चलता ही रहता हैं तो ये हमारी आदत बन जाता हैं.पर सवाल ये हैं कि जब वही इंसान जिसे हम अपना स्ट्रैस बस्टर (stress buster) समझते हैं यानी हमारी चिंता हरने वाला ,वही अगर हमसे पीछा छुड़ाने वाला बन जाएं तो,और देखा जाएं तो ऐसा दौर लगभग सबके जीवन में आता हैं. 

और यहीं से हमारे दिमाग का कीमा बनता हैं. मतलब ये कि ,हम तो उसे अपनी आदत बना लेते हैं. पर वो आदत हमसे पीछा छुड़ाने लगती हैं. और उसके बाद तो हमारा दिल कितने टुकड़ों में बंटता हैं ये शायद हमे भी नहीं पता होता. और ऐसे टाइम में हम दुनिया जहां के गम के गाने सुनने लगते है, वैसे कुछ लोग नहीं भी सुनते .

बहराहाल यहीं से गिरने और सभंलने की बात आती हैं. क्योंकि अगर आप स्वाभिमानी हुए तो उसे भुलेंगे,यानी टाटा बाय-बाय. मतलब कोई नहीं यार वाली स्थिति, पर अगर आप स्वाभिमान से कोसो दूर हैं तो आप उसके सामने रोएंगे और गिड़गिड़ाएंगे .इसलिए अगर यहीं से आप संभले और गम में डूबने की बजाएं खुद पर ध्यान दें तो  आपकी ज़िंदगी की कहानी सुपरहिट हो सकती हैं.

अब सवाल ये आता हैं कि ये कहानी हिट कैसे होगी ,तो भाई वो ऐसे होगी कि अपने आप पर काम कीजिए. यानी एक पुरानी कहावत के अनुसार पहले अपनी कीमत बढ़ाओ ,उसके बाद पूरी दुनिया तुम्हें पूछेगी. जैसे किसी दूसरे को अपनी ज़िंगदी की आदत बनाई थी ,वैसे अब खुद की ज़िंदगी को आदत बनाओ.अपने करियर पर ध्यान देकर ,अपने स्वास्थ को सुधार कर ,अपनी पर्सनाल्टी (personality) बना कर .और उसके बाद लोग आपसे आपका वक्त मांगेगे .

पर सौ में से ऐसे सिर्फ दस लोग ही होते हैं जो गिर कर फिर आगे बढ़ते हैं और वो भी दोगुनी रफ्तार के साथ.नहीं तो अक्सर कर लोग हमेशा दूसरों के आगे गिड़गिड़ाते ही रहते हैं. इसलिए कभी भी किसी को अपनी आदत बनाना खतरनाक ही साबित होता हैं.ज़िंदगी में जो भी आए उनसे मिलिएं ,बात करिएं लेकिन ये सोचना कि बस यही मेरा बेस्ट फ्रैंड या फिर सब कुछ हैं, तो ये ख्याल खुद को बेवकूफ बनाएगा और कुछ नहीं.  

तो मेरे इस लेख को आपको क्या लगता हैं ,किसी को आदत बनाना सही हैं या गलत ?



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