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Showing posts from July, 2023

खुद की जिंदगी को औरों से तुलना करना किसी ज़हर से कम नहीं

 हम सब अपनी जिंदगी में कई सारे सपने और चाहतों के साथ जीते है. बड़ी कार ,खुद का घर और  एक बेहतर पार्टनर . लेकिन आमतौर पर  ये सपने हमारे दिमाग बनाते है दूसरों को देखकर .जबकि गौर करने वाली बात ये है कि हम सबकी  जिंदगी एक दूसरे से अलग होती है . हमारी फैमली , आर्थिक स्थिति , घर के लोगो की सोच ,हर चीज़. पर फिर भी हम अपने आस पास के लोगों से खुद की ज़िंदगी की तुलना करने लगते है कि इसके पास ये है पर मेरे पास नहीं . यही  से शुरूआत होती है निराशा कि या यूं कहे कि एक ऐसा  slow poison जो हमारी खुशी को धीरे धीरे खत्म करने लगता है .  किसी से प्रेरित हो कर कुछ हासिल करना अलग बात हैं पर किसी की खुशियों या  achivements को देखकर खुद की स्थिति पर निराश होना या सरल शब्दों में कहे कि कुढ़ना ये एक ऐसे खराब दही के समान है जो जमने के बाद कसैला होता है जिसे सिर्फ फेका ही जाता है .   आमतौर पर ये पड़ाव अमूमन हर किसी के जीवन में आता है . लेकिन इससे हमेशा सावाधान रहे .क्योंकि ये हमारी छोटी छोटी खुशियों को ऐसे खा जाता है कि हमें अपनी  life  बेकार ,बेरंग लगती...

यहां आकर खत्म होती है जात और धर्म

किसी भी व्यक्ति की जात और धर्म उसकी पहचान का एक अहम हिस्सा है . कही एडमिशन लेना हो या नौकरी के लिए कोई फॉर्म भरना हो . जात और धर्म ज़रूर पूछा जाता है .जात और धर्म के आधार पर आरक्षण भी मिलते है. देखा जाए तो जात और धर्म को हर जगह मना जाता है . शादी के लिए भी इसको सबसे पहले रखा जाता है .यदि समान जात और धर्म में शादी न हुई तो इस शान के खिलाफ माना जाता है . इतना ही नहीं इस वजह से कितनों लोगों को मौत को घाट भी उतार दिया है . कुल मिला कर लोग जात और धर्म से किसी भी हाल में समझौता नहीं कर सकते .इस तरह की समझदारी बरसों से चली आ रही है .जो लोग खुद को ऊंची जात का मानते है  वो किसी अन्य  जात के द्वारा दिया हुआ पानी नहीं पी सकते , और वो इसलिए क्योंकि वह उस व्यक्ति को वो नीच मानते है यहा्ं तक कि उसके घर जा कर खा भी नहीं सकते .क्योंकि उसे अछूत मानते है. पुराने समय में तो मंदिर तक अलग थे.जबकि स्वयं भगवान तक ऐसे ऊंच नीच हो नहीं मानते लेकिन समाज में लोगों ने खुद के ऐसे नियम बना डाले की अगर भगवान खुद देखे तो उन्हें हंसी आए .  खैर एक जगह है जहां हर व्यक्ति  शुद्र,दलित ,क्षत्रिय, ब्राह्मण...