यहां आकर खत्म होती है जात और धर्म
किसी भी व्यक्ति की जात और धर्म उसकी पहचान का एक अहम हिस्सा है . कही एडमिशन लेना हो या नौकरी के लिए कोई फॉर्म भरना हो . जात और धर्म ज़रूर पूछा जाता है .जात और धर्म के आधार पर आरक्षण भी मिलते है. देखा जाए तो जात और धर्म को हर जगह मना जाता है . शादी के लिए भी इसको सबसे पहले रखा जाता है .यदि समान जात और धर्म में शादी न हुई तो इस शान के खिलाफ माना जाता है . इतना ही नहीं इस वजह से कितनों लोगों को मौत को घाट भी उतार दिया है . कुल मिला कर लोग जात और धर्म से किसी भी हाल में समझौता नहीं कर सकते .इस तरह की समझदारी बरसों से चली आ रही है .जो लोग खुद को ऊंची जात का मानते है वो किसी अन्य जात के द्वारा दिया हुआ पानी नहीं पी सकते , और वो इसलिए क्योंकि वह उस व्यक्ति को वो नीच मानते है यहा्ं तक कि उसके घर जा कर खा भी नहीं सकते .क्योंकि उसे अछूत मानते है. पुराने समय में तो मंदिर तक अलग थे.जबकि स्वयं भगवान तक ऐसे ऊंच नीच हो नहीं मानते लेकिन समाज में लोगों ने खुद के ऐसे नियम बना डाले की अगर भगवान खुद देखे तो उन्हें हंसी आए .
खैर एक जगह है जहां हर व्यक्ति शुद्र,दलित ,क्षत्रिय, ब्राह्मण जैसे शब्द को नज़रअंदाज़ कर देता है . दिमाग पर ज़ौर डालने से पहले हम ही आपको बता देते है .दरअसल बात है उस रंग की जिसे लोग प्यार का रंग कहते है और वो है लाल रंग जो कि हमारे रक्त,खून का है .....
यानी बात ये है कि जब कभी भी हमारे किसी अपने को खून की अवश्यकता पड़ेगी तब हम ये पूछेगे ही नहीं कि ये किस जात या धर्म का खून है . तब तो हमें सिर्फ डॉक्टर के द्वारा बताए खून के type O positive, AB negative आदि खून की यूनिट दिखेगी .
और यहा कुछ समय के लिए सभी इंसान एक हो जाते है . न धर्म और न ही जात ! कुछ दिखता ही नहीं . हंसी वाली बात ये है कि कल तक जिन लोगों की परछाई पड़ने से भी लोग खुद को अपवित्र मानने लगते था .उनके खून में उन्हें कोई दोष दिखता ही नहीं . वाह !!! यहां तक कि यहां इज्जत की भी कोई फिक्र नहीं होती .
खैर इस लेख के माध्यम से मैं किसी की सोच नहीं सुधार सकती .बस ये सवाल करती हूं कि आखिर खून लेने के समय आप क्यों जात और धर्म को consider नही करते वहां भी करा करिए .
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