खुद की जिंदगी को औरों से तुलना करना किसी ज़हर से कम नहीं

 हम सब अपनी जिंदगी में कई सारे सपने और चाहतों के साथ जीते है. बड़ी कार ,खुद का घर और  एक बेहतर पार्टनर . लेकिन आमतौर पर  ये सपने हमारे दिमाग बनाते है दूसरों को देखकर .जबकि गौर करने वाली बात ये है कि हम सबकी  जिंदगी एक दूसरे से अलग होती है . हमारी फैमली , आर्थिक स्थिति , घर के लोगो की सोच ,हर चीज़. पर फिर भी हम अपने आस पास के लोगों से खुद की ज़िंदगी की तुलना करने लगते है कि इसके पास ये है पर मेरे पास नहीं . यही  से शुरूआत होती है निराशा कि या यूं कहे कि एक ऐसा  slow poison जो हमारी खुशी को धीरे धीरे खत्म करने लगता है . 


किसी से प्रेरित हो कर कुछ हासिल करना अलग बात हैं पर किसी की खुशियों या  achivements को देखकर खुद की स्थिति पर निराश होना या सरल शब्दों में कहे कि कुढ़ना ये एक ऐसे खराब दही के समान है जो जमने के बाद कसैला होता है जिसे सिर्फ फेका ही जाता है . 


 आमतौर पर ये पड़ाव अमूमन हर किसी के जीवन में आता है . लेकिन इससे हमेशा सावाधान रहे .क्योंकि ये हमारी छोटी छोटी खुशियों को ऐसे खा जाता है कि हमें अपनी  life  बेकार ,बेरंग लगती है . ऐसे समय हम सिर्फ खुद को और नीचे धकेलते है और दूसरों को देख कर उदास होते है और अपनी जिंदगी जी ही नहीं पाते . 


इसलिए जब भी आपको लगे की आपकी जिंदगी में सब बेकार है और बाकी लोग खुश है  Grow कर रहे है .तो तुरंत संतुष्टि की शताब्दी एक्सप्रेस पकड़िए और ये सोचिए की सबकी जिंदगी अलग होती है . और कभी भी  compare मत करिए . क्योंकि जहां आपने compare किया वहां से आपकी खुशियों की उल्टी गिनती शुरू हो  जाती है . 


  जब भी आप किसी  व्यक्ति से खुद को compare  करें तो  हर पहलू को  भी देखे .उसकी आर्थिक स्थिति ,उसका घर , उस के माता पिता की सोच , उसकी बुद्धि ये  सभी चीज़े आपसे अलग हो सकती है . इसलिए उसका जीवन आपसे अलग है . और अगर ये सब चीज़े आपके भी पास हो तो किस्मत पर छोड़ दीजिए कि उसकी किस्मत में  था . और आपकी नहीं . लेकिन कभी भी  तुलना वाली जिंदगी मत  जीना . नहीं तो ये हमें इतना निराशा के कुएं में धकेल देगी  कि जहां से हम निकल भी न पाएं . इसलिए दूसरों की जिंदगी पर zoom in , zoom out  करना छोड़ों और बस खुद की जिंदगी के   primary और secondary रंग से  life  को  enjoy करिए . 




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