ये कल्चर है अपनी संस्कृति को भुलाना...
आज के इस दौर में अंग्रेज़ी भाषा कितनी महत्वपूर्ण है, ये हम सब बखूबी जानते है ...देश का आर्थिक क्षेत्र हो या फिर सामाजिक हर तरफ सिर्फ अंग्रेज़ी भाषा का ही बोलबाला है ... और अब तो लोगों की ये मानसिकता भी बन गई कि इंग्लिश आती है तो भाई तुम पढ़े लिखे हो और समाज के ऊंचे तबके से तालुक रखते हो ... सच में हिंदी अपनी भाषा हो कर भी हमारी नहीं है ...
और हिंदी को खुद से दूर करने का पूरा श्रेय हम सब देशवासियों को ही जाता है ...उसका साधी उदाहरण कई जगह देखने को मिलता है जैसे कि हमारे देश में ज़्यादातर दुकानों के नाम अंग्रेज़ी में लिखे होते है ...नौकरी के लिए साक्षात्कार (इंटरव्यू) भी अंग्रेज़ी भाषा में ही होता है जैसे किसी विदेशी कपंनी हो ...इसी के साथ ही हमारे देश के जितने भी चर्चित चेहरे है खासकर सिनेमा जगत के सितारे ये सब इंग्लिश में ही अपने इंटरव्यू देते है ...इतना ही नहीं हम दूर न जाकर खुद को ही देखे तो हम में से कुछ ही लोगों होगे जिन्हें हिंदी गिनती आती हो...यहां तक कि अगर चार लोगों के बीच अगर हम हिंदी के बजाए अंग्रेज़ी में बोलते है तो खुद पर गर्वान्वित महसूस करते है ...
और देखा जाए तो यही है हमारी मातृ भाषा हिंदी की तस्वीर ..
बहरहाल एक बात गौर करने वाली है , हम सब हर साल 14 सितंबर को हिंदी पखवाड़ा दिवस मनाते है ..हिन्दी भाषा का गौरव मनाने के लिए पर मुझे लगता है कि इस दिन हम हिंदी भाषा को याद करते है कि हिंदी भी हमारी भाषा है ...ये एक तंज भी है और कटु सत्य भी है कि हम अपनी संस्कृति को कम अंकते है और दूसरे देश की संस्कृति को ज़्यादा अहमियत देते है ....
जबकि हमें अपनी संस्कृति को साथ रखते हुए दूसरी संस्कृति को अपनाना चाहिए .. इसका मतलब . बिलकुल भी नहीं नहीं है कि अपनी पहचान को भूल ही जाए...
Good👍 thought
ReplyDeleteI support you
Correct 👏
ReplyDeleteNice blog