कुछ करना है तो मेहमान बनो
घर का सबसे खास मेहमान कौन होता है ? ये प्रश्न सुनते ही आपके दिमाग में जिन लोगों का नाम आया होगा .उसकी जगह आप अपना ही नाम लीजिए.क्योंकि घर के सबसे खास मेहमान तो हम ही होते हैं. जिसके आने से हमारे माता पिता के चेहरे खिल जाते है.सालों या महीनों से भले ही घर में अच्छी चीज़ न बनी हो ,पर हमारे आते ही हमारी मां किचन में वो सब बनाने लगती हैं जो हमें पसंद हो .
ऐसे मेेहमानो के आने पर रौनक आमतौर पर बड़े त्यौहारों पर देखने को मिलती है. गांव की ओर जाने वाली बसों में ऐसे ही खास मेहमान बैठे होते है ,जिनके आते ही घर की रौनक दोगुनी हो जाती है. भले ही वो रौनक दो चार दिन की ही क्यों न हो.देखा जाए तो अपने ही घर में मेहमान हम खुद ही बनते हैं.और ये रास्ता हम खुद ही चुनते है .पर क्यों ? इसका जवाब है एक बेहतर जिंदगी के लिए .अच्छी पढ़ाई ,अधिक पैसे वाली नौकरी के लिए. पर इसके लिए जो कीमत चुकानी होती है वो बहुत ही बड़ी होती है .
वैसे देखा जाए तो ऐसे खास मेहमान के आने और घर में रूकने के दिन भी वक्त के साथ बदलते है.उदाहरण के तौर पर जब कॉलेज का पहला -दूसरा साल होता है तो बड़ छोटे त्यौहार पर आना होता हैं , वही कॉलेज के आखिरी साल तक सिर्फ खास त्यौहार पर आना होता है.और उसके बाद नौकरी लग जाने पर तो महीने नहीं साल में आना होता है.
SUCCESS की चाह हमें अपने ही घर का मेहमान बना देती हैं.
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