खुद की जिंदगी को औरों से तुलना करना किसी ज़हर से कम नहीं
हम सब अपनी जिंदगी में कई सारे सपने और चाहतों के साथ जीते है. बड़ी कार ,खुद का घर और एक बेहतर पार्टनर . लेकिन आमतौर पर ये सपने हमारे दिमाग बनाते है दूसरों को देखकर .जबकि गौर करने वाली बात ये है कि हम सबकी जिंदगी एक दूसरे से अलग होती है . हमारी फैमली , आर्थिक स्थिति , घर के लोगो की सोच ,हर चीज़. पर फिर भी हम अपने आस पास के लोगों से खुद की ज़िंदगी की तुलना करने लगते है कि इसके पास ये है पर मेरे पास नहीं . यही से शुरूआत होती है निराशा कि या यूं कहे कि एक ऐसा slow poison जो हमारी खुशी को धीरे धीरे खत्म करने लगता है . किसी से प्रेरित हो कर कुछ हासिल करना अलग बात हैं पर किसी की खुशियों या achivements को देखकर खुद की स्थिति पर निराश होना या सरल शब्दों में कहे कि कुढ़ना ये एक ऐसे खराब दही के समान है जो जमने के बाद कसैला होता है जिसे सिर्फ फेका ही जाता है . आमतौर पर ये पड़ाव अमूमन हर किसी के जीवन में आता है . लेकिन इससे हमेशा सावाधान रहे .क्योंकि ये हमारी छोटी छोटी खुशियों को ऐसे खा जाता है कि हमें अपनी life बेकार ,बेरंग लगती...