सिनेमा में मोहब्बत का बदलता रंग.....


सिनेमा में मोहब्बत का बदलता रंग.....

       यूं तो भारतीय सिनेमा में हमें इमोशन के हर पहलू देखने को मिलते है , मैलो ड्रामा से लेकर प्यार ,दोस्ती और चोर पुलिस की भागा- दौड़ी तक...और यहां तक की अब तो हम फिक्शन से अलग बायोपिक पर भी आ गए है ...
और सिनेमा प्रेमियों ने फिल्मों के इस बदलते रंग को अपनाया भी हैं ...पर अगर हम लवस्टोरी की बात करें तो मुझे मोहब्बत का ये बदला हुआ रंग कुछ हज़म नहीं हुआ...


अगर मैं पहले और अब के दौर की बात करुं तो , पहले  की फिल्मों में ,प्यार एक ज्ज़बात हुआ करता था.. वही अब का प्यार केवल दिखावा है या फिर यूं कहे की अब की फिल्मों में मोहब्बत को सिर्फ शारीरिक सबंध के ज़रिए ही पेश किया जाता है ...देखा जाए तो अब की फिल्मों में प्यार को  बगैर इनटेमेट सीन के दिखाया ही नहीं जाता ...फिल्मस् के मेकर्स को लगता है कि आज की जनता बस यही देखना चाहती है...और इसीलिए आज की पीढ़ी में भी मोहब्बत का वही नया रंग घुलता दिख रहा है...


पर मेरा मानना है कि , फिल्म में कहानी  नाम की भी कोई चीज़ होती है ...इंटेमेट सीन के बगैर भी लव स्टोरी दिखाई जा सकती है ,और वो भी बहुत अच्छे ढंग से...जिसमें  लव स्टोरी रोमंटिक हो ना की लस्ट...

और ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं कि ऐसी साफ- सुथरी फिल्मों  को कोई पसंद नहीं करेगा ...ज़रुर पसंद किया जाएगा... बस इसके लिए एक नज़रिया होने की ज़रुरत है  ...जिसे खूबसूरत कहानी के ज़रिए पर्दे उतारा जा सके .... 




Comments

Popular posts from this blog

एक खत शाहरूख के हेटर्स के नाम !!!!

ज़माना है fakism का तो ज़रा दिल और दिमाग से काम करें

हिंदू मुस्लिम हैं तो मुद्दा भड़केगा !!!!