एक बाज़ार ऐसा जहां बिकती है दुल्हने
एक बाज़ार ऐसा जहां बिकती है दुल्हने ....
दुनिया के हर माता -पिता का सपना होता है अपने बच्चों की शादी करना ...और वही अगर बेटी की शादी की बात हो तो वो और भी महत्तवपुर्ण हो जाती है ... लेकिन आपको ये जानकर काफी हैरानी होगी कि बुल्गारिया देश में एक ऐसा भी समाज है जहां लड़कियों की शादी करने के लिए पहले उन्हें बेचा जाता है...
दरअसल बुल्गारिया देश में एक रोमा नाम का सामाज हैं, जिसमें कालदाज़ी नाम की एक पिछड़ी जाती है....पेशे से इस जाति के लोग लौहार का काम करते है ...और इनकी आर्थिक स्थिति भी इतनी अच्छी नहीं होती हैं....और इसलिए इनके यहां शादी एक आर्थिक रुप से लाभान्वित माना जाता हैं ...
इस जाति में लड़कियों की शादी के लिए उन्हें सबसे पहले दुल्हन बाज़ार में बेचा जाता है ...और इस बाज़ार का आयोजन हर चार साल में किया जाता है ... इस बाज़ार मे ंकुवांरी लड़किया हिस्सा लेती है ,जिनकी उम्र 16 या उससे अधिक होती है ... वैसे ज़्यादातर लोग कम उम्र की ही लड़कियों को खरीदते है ...
इस रुढ़ीवाद ईसाई समाज मे ंलड़कियों को ज़्यादा पढ़ने की इजाज़्त नहीं होती है , और न ही नौकरी करने की ... और साथ ही लड़के उन लड़ियों को बिलकुल भी नहीं खरीदते , जिन्होंने पहले से ही किसी से शारीरिक संबंध बनाए हो... ऐसी लड़कियों को वैश्या और बेकार महिला माना जाता है ...
दूसरी ओर बात करें इस अजीब बाज़ार की प्रक्रिया की तो , प्रत्येक लड़की के घर वाले अपनी बेटी की ऊंची बोली रखते है ताकि उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा पैसे मिल सके ... हर लड़के को अपनी पसंद से लड़की चुनने का अधिकार होता है , बस इसके बदले में उसे पैसे देने होते है ... और जब दोनों के परिवार वाले तय कीमत को लेकर राज़ी हो जाते है, तो लड़का और लड़की एक दूसरे से बात-चीत कर एक दूसरे को जानने की कोशिश करते है ...
बहरहाल ,कभी -कभी ऐसा भी होता है कि कोई खरीद दार ज़्यादा पैसे देकर लड़की को खरीद लेता है पर लड़की को वो पसंद नहीं आता है ... पर परिवार की आर्थिका तंगी को देखते हुए उसे शादी करनी पड़ती है ...
वही दूसरी ओर कुछ लोग ज़्यादा पैेसे नहीं दे पाते है फिर चाहें लड़का कितना ही काबिल क्यों न हों ...और ऐसे लड़को से शादी नही कराई जाती और अगले बाज़ार तक का इंतज़ार करना पड़ता है ...
इसी के साथ इस विवाह बाज़ार के लिए लडकियां कई दिन से तैयारी करती है ... वो श्रंगार की चीज़े खरीदती है , नए कपड़े खरीदती है ताकि वो आसानी से लड़कों को पसंद आ सके.. कहने का मतलब वो जितनी सुंदर देखेगी उतना ही उन्हें मुंह मांगे पैसे मिलेगे...
अगर बात करें इस समाज की लड़कियों की राह की तो कुछ लड़कियां इसे अपना कल्चर मानती है तो वही कुछ इसे गलत ठहराती है ...पर प्रत्येक लड़कियों का ये मानना हैं कि उन्हें पढ़ाई की आज़ादी मिलनी चाहिए...







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