क्या शादी के लिए समान जाति और धर्म ज़रुरी है ?

क्या शादी के लिए समान जाति और धर्म  ज़रुरी  है  ?

 भारत देश की जब भी बात आती है तो उसे एकता में विभिन्नता का देश माना जाता है  , क्योंकि यहां की बोली ,भाषा, धर्म  और मौसम हर चीज़ में विभिन्नता पाई जाती है ...लेकिन जब बात शादी की आए तो ये एकता कही खो जाती है ...और ऐसा इसलिए और होता है  क्योंकि हमारे देश में  विभिन्न प्रकार के धर्म के साथ ही अनेक तरह की जातियां भी है शामिल है ,जो लोगों को एक होने नहीं देती...

                                        
पर क्या सच में विवाह के लिए ये सब मायने रखता है ... मेरे ख्याल से नहीं, क्योंकि जो भी हो पर अन्त में हमारा व्यवहार ही मायने रखता है ...उदाहरण के तौर पर जब किसी की शादी होती है तो उसके कुछ दिन बात ही घरवालों के बीच अलगाव की रेखा खिंच जाती है ... और सच यही है कि आपका अपना स्वभाव ही महत्तवपूर्ण होता है ... 

देखा जाए तो भारत देश में इसी वजह से कई युवा आत्महत्या या घर से भाग जाने का रास्ता अपनाते है ...
लेकिन उसके बावजूद भी लोगों की रुढ़ीवादी सोच कायम रहती है ...और उनके लिए  शादी के लिए समान धर्म और जाति  ही मायने होता है ...




जबकि देखा जाए यदि विभिन्न  जााति और धर्मों में शादियां होने लगे तो समाज के बीच एकता आसानी से स्थापित हो सकेगी ... और फिर इनके बीच जो झगड़े होते वो शांत हो जाएगे ...पर ऐसे कट्र्टर लोगों के लिए  उनकी मान ,प्रतिष्ठा सब उनका धर्म ही है ... 

                                    
वही दूसरी ओर हमारे देश के ही पूर्वजों  ने ये कहा है कि "मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना "...पर ये बात इन्हें समझ में न आई है और न ही आएगी ... 




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